मानव के शरीर पर विद्युत के झटके के प्रभाव, उसके शरीर से होकर गुजरने वाली धारा विद्युत के सम्पर्क में रहने का समय (time Of Contact) तथा विद्युत की प्रकृति (a.c./d.c.) पर निर्भर करता है। मानव शरीर के लिये दिष्ट धारा की अपेक्षा, प्रत्यावर्ती धारा अधिक खतरनाक (dangerous) होती है और वोल्टता की अपेक्षा धारा अधिक खतरनाक होती है। मानव के शरीर पर, वैद्युत धाराओं के प्रभाव सम्बन्धी तालिका
वैधुत धारा का प्रभाव (effect Of Electric Current)
1. 1 से 8 MA तक – इसके झटके की अनुभूति होती है, परन्तु यह कष्टदायक नहीं होती। अर्थात् मानव इसे सहन कर सकता है।
2. 8 से 15 MA तक – इससे कष्टदायक झटका लगता है, परन्तु स्नायु सम्बन्धी नसों का नियंत्रण कायम रहता है, इसलिये इसका सहन करना मानव के व्यक्तित्व पर निर्भर करता है।
3. 15 से 20 MA तक – इससे कष्टदायक झटका लगता है। स्नायु सम्बन्धी नसों का नियंत्रण कायम नहीं रहता, इसलिये मानव इसे सहन नहीं कर सकता
4. 20 से 50 MA तक – इसमें स्नायु सम्बन्धी नसों के अत्यधिक संकुचन के कारण, साँस लेना कठिन हो जाता है।
5. 50 से 100 MA तक – इसमें श्वास रुकने के कारण दिल तक की धड़कन बन्द हो जाती है अर्थात् इसमें मृत्यु सम्भव है।
6.100 MA से अधिक – इससे शरीर जल जाता है। बिजली के झटके के दौरान स्नायु सम्बन्धी नसें इतनी सिकुड़ जाती हैं कि दिल का धड़कना बन्द हो जाता है। परिणामस्वरूप मृत्यु निश्चित है।
वैधुत धारा का प्रभाव (effect Of Electric Current)
1. 1 से 8 MA तक – इसके झटके की अनुभूति होती है, परन्तु यह कष्टदायक नहीं होती। अर्थात् मानव इसे सहन कर सकता है।
2. 8 से 15 MA तक – इससे कष्टदायक झटका लगता है, परन्तु स्नायु सम्बन्धी नसों का नियंत्रण कायम रहता है, इसलिये इसका सहन करना मानव के व्यक्तित्व पर निर्भर करता है।
3. 15 से 20 MA तक – इससे कष्टदायक झटका लगता है। स्नायु सम्बन्धी नसों का नियंत्रण कायम नहीं रहता, इसलिये मानव इसे सहन नहीं कर सकता
4. 20 से 50 MA तक – इसमें स्नायु सम्बन्धी नसों के अत्यधिक संकुचन के कारण, साँस लेना कठिन हो जाता है।
5. 50 से 100 MA तक – इसमें श्वास रुकने के कारण दिल तक की धड़कन बन्द हो जाती है अर्थात् इसमें मृत्यु सम्भव है।
6.100 MA से अधिक – इससे शरीर जल जाता है। बिजली के झटके के दौरान स्नायु सम्बन्धी नसें इतनी सिकुड़ जाती हैं कि दिल का धड़कना बन्द हो जाता है। परिणामस्वरूप मृत्यु निश्चित है।
Comments
Post a Comment