वायरिंग फॉल्ट (तारों की खराबी) पता करने के तरीके
वायरिंग फॉल्ट (तारों की खराबी) पता करने के तरीके
1. आँखों से जाँच (Visual Inspection)
अगर तार जला हुआ दिखे या जली हुई गंध आए तो वहाँ खराबी है।
ढीला कनेक्शन – स्विच, प्लग या बोर्ड में तार हिलता हो।
कटा या टूटा तार – तार का कवच (इन्सुलेशन) फटा हो।
2. कंटिन्यूटी टेस्ट (तार टूटा है या नहीं)
मल्टीमीटर को “continuity” मोड में रखें।
तार के दोनों सिरों पर जांच (probe) लगाएँ।
अगर बीप नहीं आई तो मतलब तार बीच में टूटा हुआ है।
3. शॉर्ट सर्किट टेस्ट
मल्टीमीटर को “ओहम (Ω)” मोड पर रखें।
लाइव और न्यूट्रल तार के बीच जांच करें (बिजली सप्लाई बंद करके)।
अगर रीडिंग 0 के पास है तो शॉर्ट सर्किट है।
4. वोल्टेज टेस्ट
सप्लाई चालू करके मल्टीमीटर को AC वोल्टेज मोड पर रखें।
सॉकेट या तार पर जांच करें।
अगर 220–240 वोल्ट (भारत में) नहीं आ रहा तो वायरिंग में गड़बड़ी है।
5. अर्थिंग चेक
लीकेज टेस्टर या क्लैम्प मीटर से देखें कि अर्थ वायर में करंट तो नहीं बह रहा।
अगर अर्थ में करंट है तो वायरिंग में लीकेज है।
⚠️ सावधानी:
टेस्ट करने से पहले बिजली सप्लाई बंद कर दें (सिर्फ वोल्टेज टेस्ट के समय ही सप्लाई चालू रखें)।
हमेशा इंसुलेटेड औज़ार और रबर के दस्ताने पहनें।
अगर मेन वायरिंग या बड़ी खराबी लगे तो बिजली मिस्त्री (इलेक्ट्रीशियन) को बुलाना ही सबसे सुरक्षित है।
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